शिवपुरी (अजय दण्डौतिया) स्मार्ट उपभोक्ताओं से सफेदपोश अंदाज में की जाने वाली लूट के लिए रिलाइंस कंपनी पूरी तरह कुख्यात हो गई है। स्मार्ट उपभोक्ताओं को अपराधिक अंदाज में पेयी सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनका मैन बेलेंस बहुत हद तक काटा नहीं बल्कि लूटा जा रहा है। लूटपाट के लिए स्मार्ट उपभोक्ताओं में बुरी तरह बदनाम रिलाइंस कंपनी पर यह भी आरोप प्रमाणिक है कि यह कंपनी उपभोक्ताओं को आर्थिक तौर पर ठगने के लिए मनमाने अंदाज में उनकी फैसिलिटियां खत्म कर देती है और उनकी मर्जी के बगैर उन्हें पेयी फैसलिटियां उपलब्ध कराकर उनका मैन बैलेंस में बड़ी सेंधमारी कर डालती हैं।
बिना जानकारी के फैसलिटियां छीनने और उपलब्ध कराने में
कंपनी ने किए बारे-न्यारे
ताजा तरीन मामला 2012 के आखरी दिनों से जुड़ा है। यहां कंपनी की 148 और 59 रूपये में दी जाने वाली फैसलिटियां उपभोक्ताओं की खत्म कर डाली गई । 30 तारीख की रात से लेकर 1 तारीख की रात तक उपरोक्त फैसलिटियों का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिला। बैलेंस डालने वाले एजेंटों ने बताया कि नव वर्ष के उपलक्ष्य में रिलाइस ने फैसलिटियां खत्म कर दी हैं। उपभोक्ताओं को फैसलिटि खत्म करने की सूचना न देने पर एजेंट ने दांत दिखाकर कहा कि यह बड़े लेबिल की बात है। फैसलिटियां खत्म होने पर डलवाए गए बैलेंस पर भी रिलाइंस की लुटेरी नजर का प्रमाणिक सच यह है कि इन फैसलिटियों का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं ने मनमाने अंदाज में खत्म की गई फैसलिटी के परिणाम स्वरूप जब नया रीचार्ज फैसलिटी अवधि में ही कराया तो कंपनी ने नए बैलेंस को खा जाने-लूट लेने की नियत से उपभोक्ताओं को रिंगटोन और एसएमएस पैक बिना मांगे ही दे डाले और उनका मैन बैलेंस खा-लूट लिया।
स्मार्ट उपभोक्ता 9827756001 ने बताया कि वह अपने नंबर पर 148 की फैसलिटी का उपयोग कर रहे थे इस मासिक फैसलिटी में 300 मिनट स्मार्ट दिन में 300 मिनट रात में और 300 मिनट अन्य मोबाइल पर बात करने की पात्रता है जिसे छीन लिया गया और जब 30 रूपये का नया बैलेंस कराया गया तो उसमें मिले बैलेंस को खा-लूट लेने के लिए उपभोक्ता की नारजी के बगैर वेस हंगामा सुविधा कंपनी ने उपलब्ध कराकर बैलेंस ही खत्म कर डाला। इस कारनामे को लुटेरी रिलाइंस कंपनी ने किस ठीटता के साथ किया है इसका अंदाजा आप इस तथ्य से लगा सकते हैं कि वेस पैक हंगामा पेयी सुविधा दिए जाने का एसएमएस भी उपभोक्ता किया गया और साथ ही एक अन्य एसएमएस में उल्लेख किया गया कि यदि आप उपरोक्त सेवा को खत्म करना चाहते हैं तो यूएनएसयूबी 2815 टाइप कर 155223 टोल फ्री नंबर पर एसएमएस कर दें।
यहां यह गौरतलब है कि जब सुविधा मांगी ही नहीं थी तो दी क्यों गई और यदि इसे खत्म कराने का एसएमएस भी उपरोक्त नंबर पर भेज दिया जाता है तो भी मनमाने अंदाज में फैसलिटी देने के ऐवज में उपभोक्ता से आर्थिक ठगी-लूट तो कंपनी कर ही चुकी है। ऐसी लूटपाट की उपभोक्ता द्वारा शिकायत करने पर कम्पलेंट नंबर बिजी और मशीनी आवाज ही उपभोक्ता के आक्रोश को और बढ़ाती रही। वहीं एक अन्य उपभोक्ता ने बताया कि उसने 59 रूपये की पाक्षिक सेवा ले रखी थी जिसमें रात 11 से सुबह 6 बजे तक स्मार्ट टू स्मार्ट की फ्री फैसलिटी है। जिसे उसे सूचना दिए बगैर खत्म कर दिया गया जबकि उसे रिचार्ज कराए कुल 3 दिन हुए थे।
यह दो उदाहरण मात्र हैं जो यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि रिलाइंस कंपनी सफेदपोश अंदाज में अपने उपभोक्ताओं के साथ जमकर अप्रत्यक्ष लूट-और खुलेआम ठगी आधिकारिक अंदाज में कर रही है। इस लूटपाट में रिलाइंस कंपनी पूरी तरह दक्ष हो चुकी है। कंपनी ने भारतीय दूर संचार नियामक आयोग के कानूनों को ठेंगा दिखाकर बीते वर्ष 2012 में अपने उपभोक्ताओं के साथ जमकर आर्थिक लूटपाट कर डाली थी और 2013 का पहला दिन भी खुलेआम लूट के नाम रहा है। कई उपभोक्ताओं को उनकी सहमति के बगैर रिंगटोन और एसएमएस पैक जबरिया उपलब्ध कराए जाने के साथ उनका मैन बैलेंस भी तत्काल काट लिया गया है। जबकि कोर्इ भी पेयी (आर्थिक सेवा) सुविधा उपलब्ध कराने के संदर्भ में भारतीय दूर संचार नियामक आयोग का स्पष्ट नियम है कि जब तक उपभोक्ता अपनी सहमति दर्ज नहीं कराता है तब तक उसे कोई भी पेयी सेवा कतई उपलब्ध न कराई जाए।
आपको जानकर आश्चर्य होगा लेकिन यह पूरी तरह सच है कि हर दूसरे स्मार्ट उपभोक्ता की यह शिकायत है कि कंपनी ने मनमाने अंदाज में उन्हें रिंगटोन और एसएमएस पैक की सेवा उनकी मर्जी के बगैर उन पर न सिर्फ थोपी बल्कि उनका मैन बैलेंस भी काट लिया। उपभोक्ताओं के साथ यह ठगी और सीधे शब्दों में सफेदपोश अंदाज में की गर्इ लूटपाट के बहुतेरे मामले हैं। जिनकी शिकायत कंपनी के कम्पलेंट नंबर पर करने की प्रक्रिया इतनी दूभर है कि उपभोक्ता शिकायत करने की प्रक्रिया में ही हताश हो जाता है। अधिकांश समय पर मशीनी आवाज ही उपभोक्ता को ठगती रहती है। यहां ठगे जाने से आशय यह है कि आपकी शिकायत भी आपको आर्थिक तौर पर चूना लगाने की वजह बनती है। मतलब साफ है शिकायत के भी पैसे लगते हैं और जिद पर अडे उपभोक्ता की यदि बात भी होती है तो उसे व्यवसायिक अंदाज में दिखा लेते हैं।
यह शाखा हमारी नहीं है आप फला नंबर पर बात करें जैसे जबाव देकर चलता कर दिया जाता है। रिलाइंस की लगातार लूटपाट-ठगी का शिकार बने उपभोक्ताओं की पीड़ा यह है कि उनकी कहीं कोई सुनवार्इ नहीं है। काल सेंटरों पर की गई शिकायतें व्यवसायिक अंदाज में नजर अंदाज कर दी जाती हैं और लचीले कानूनों की वानगी यह है कि उपभोक्ता फोरम में उपभोक्ताओं के साथ हुई इस तरह की ठगी-लूट की सुनवाई सूत्रों के अनुसार नहीं हो सकती है।
दर्ज नहीं हुई एफआईआर
रिलाइंस कंपनी की उपभोक्ताओं के साथ की जाने वाली लूटपाट का इतिहास अब काफी पुराना होता जा रहा है। जितने पुराने कंपनी के उपभोक्ता हैं उतना ही पुराना उसकी ठगी का इतिहास है। कंपनी की पेयी फैसलिटियों से अपना मैन बैलेंस लुटा चुके एक उपभोक्ता ने उपरोक्त मामले में अपने साथ बीते घटनाक्रम को सार्वजनिक करते हुए कहा कि चंद माह पहले रिलाइंस कंपनी ने मुझे एसएमएस पैक और रिंगटोन की फैसलिटी मेरी मर्जी के बगैर मुझे उपलब्ध करा दी थी। कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं के साथ किए जा रहे आर्थिक शोषण के खिलाफ मैंने अपने पेशवर (एडव्होकेट) अंदाज में शिवपुरी एसपी आरपी सिंह से सीधे संपर्क साधा और उनसे आग्रह किया कि मैं रिलाइंस कंपनी के कर्ताधर्ता (अंबानी) के खिलाफ एफआईआर कराना चाहता हूं।
इस आग्रह के साथ कंपनी द्वारा की गई लूट खसोट की पूरी जानकारी भी मेरे द्वारा उन्हें दी गई । जिस पर उन्होंने उपभोक्ता फोरम के किसी कानून विद न्यायाधीश से उपरोक्त मामले में न सिर्फ रायसुमारी की बलिक मुझसे भी उनकी बात कराई । मैंने अपना पक्ष उनके सामने संक्षिप्त में रखा और उनसे भी आग्रह किया कि यह यदि लूट में नहीं आता है तो निसंदेह यह ठगी का अपराध तो बनता ही है और इस मामले में कंपनी के मालिक के खिलाफ ठगी का अपराध पंजीबद्ध कराया जा सकता है जिस पर उपरोक्त न्यायाधीश महोदय ने सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि एफआईआर हो सकती है।
लेकिन इस घटनाक्रम का खेद जनक पहलु यह है कि तत्समय पुलिस अधीक्षक ने एफआईआर की कार्रवाई न कराते हुए उपभोक्ता नंबर 9827756001 को यह समझाइश दी कि वह कंपनी के मुख्यालय पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत पर कंपनी 7वी टेलीग्राफ एक्ट के अंतर्गत आरबीटर नियुक्त करेगी जो आपकी शिकायत को सुनेगा और उसका वाजिव समाधान भी करेगा। यदि तत्समय एफआईआर हो जाती तो उपभोक्ताओं को आगे ठगी-लूट का शिकार नहीं बनना पड़ता।
उल्लेखनीय है कि उप्भिकता ने पुनरू पेयी सर्विसें मनमाने अंदाज में उपलब्ध कराकर उसके मैन बैलेंस पर डाले डांके के मामले को फिर गंभीरता से ले लिया है और उपभोक्ता ने दम से बताया है कि इस बार वह आर्थिक शोषण के मामले में एफआईआर कराकर ही दम लेंगे, भले ही इसके लिए उन्हें किसी भी स्तर पर क्यों न जाना पड़े क्योंकि देश भर में ऐसे काले कारनामे करके कंपनी ने आरोपित तौर पर करोडों के बारे न्यारे किए हैं।

