इंदौर [ NI 24 ] क्राइम ब्रांच ने फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह के सरगना बीकॉम के दो छात्र हैं। इनमें एक कलेक्टर ऑफिस के समाधान केंद्र में अस्थायी कर्मचारी के रूप में नौकरी भी करता है। इस गिरोह में चार ब्रोकर भी शामिल हैं। सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पकडे गए आरोपी एसडीएम व अन्य अफसरों की सील लगाकर कुछ घंटे में वोटर आईडी, राशनकार्ड, जाति प्रमाण पत्र, स्थायी निवासी प्रमाण पत्र बनाकर दे देते थे।
एसपी डॉ. आशीष ने बताया क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि कलेक्टर कार्यालय के समाधान केंद्र में कुछ लोग फर्जी प्रमाण पत्र बना रहे हैं। एएसपी क्राइम जितेंद्रसिंह ने मुखबिर मुकेश माहेश्वरी को वहां भेजा। उससे एक ब्रोकर ने जाति प्रमाण पत्र के लिए पांच हजार रु. मांगे। तीन हजार में सौदा तय हुआ। ब्रोकर ने कुछ घंटों में मुकेश का प्रमाण पत्र मुकेश पथरोड के नाम से बनाकर दे दिया।
जांच में इसका जावक क्रमांक, एसडीएम के हस्ताक्षर व सील सब फर्जी निकले। उसके बाद पुलिस ने उक्त ब्रोकर को दबोच लिया। पूछताछ में उसके सभी साथी भी पकड़ में आ गए। रोज तीन-चार प्रमाण पत्र बना रहे थे- पूछताछ में पता चला आरोपी जुलाई से जालसाजी कर रहे थे। वे रोज तीन-चार लोगों को शिकार बना लेते थे। हालांकि पुलिस के पास जानकारी है कि रैकेट एक साल से चल रहा था।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम निर्मल उर्फ सोनू पिता मनोहर मालवीय (24) निवासी अंसार कॉलोनी, पवन पिता शंकरलाल पांचाल (30) निवासी नंदननगर, संतोष पिता वीरबहादुर रावल (18) निवासी भोई मोहल्ला, सुदीप पिता जगदीश अग्निहोत्री (20) निवासी मोती तबेला, सुमित पिता भैयालाल जैन (24) निवासी लक्ष्मीपुरी मरीमाता व रोशन पिता जगदीश कामदार (18) निवासी पीर गली हैं। निर्मल गिरोह का सरगना है।
बिजली बिल के रुपए प्रेमिका पर और मौज-मस्ती में उड़ा दिए
इंस्पेक्टर महेंद्रसिंह भदौरिया ने बताया निर्मल समाधान केंद्र में अस्थायी कर्मचारी है। उसके पिता निगम में मस्टरकर्मी हैं और कलेक्टर कार्यालय में अटैच हैं। उन्हीं की सिफारिश पर निर्मल को तीन हजार रुपए प्रतिमाह पर नौकरी मिली थी।
आरोपी निर्मल आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज से बीकॉम कर रहा है। वह समाधान केंद्र के काउंटर पर लोगों से बिजली का बिल और राशि ले लेता है। उसने करीब डेढ़ महीने तक लोगों से राशि ली लेकिन जमा नहीं की। करीब ढाई लाख रुपए उसने प्रेमिका पर और मौज-मस्ती में उड़ा दिए। लोग जब बिजली कंपनी पहुंचे तो उसकी पोल खुली और उसने बाजार से ब्याज पर रुपए लेकर कंपनी में जमा किए। उसी कर्ज को चुकाने के लिए वह फर्जी प्रमाण पत्र बनाने लगा।
असली फॉर्म पर नकली प्रमाण पत्र
आरोपी समाधान केंद्र से ही राशनकार्ड, जाति प्रमाण पत्र के खाली फॉर्मेट वाले पन्नों पर फर्जी प्रमाण पत्र दे रहे थे। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फॉर्मेट कहां से चुराए गए। पुलिस ने मुकेश पथरोड का प्रमाण पत्र बनवाया था, जिस पर 2 अक्टूबर को जारी होने की तारीख थी। इसी आधार पर वह पकड़ा गया। उस पर एसडीएम की हूबहू सील व हस्ताक्षर थे।
वोटर आईडी बिना होलोग्राम का दे रहे थे : आरोपी वोटर आईडी का प्रिंट भी निकालकर दे देते थे लेकिन उस पर होलोग्राम नहीं होता था। रावजी बाजार पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के पास से एक आधार कार्ड भी मिला। उन्होंने कलेक्टर कार्यालय से 16 दिसंबर को एक बाइक भी चुराई थी, जिसे जब्त कर लिया गया है।

