लंदन [NI 24] भारत के योगेश्वर दत्त ने यहां चल रहे ओलिंपिक में कांस्य पदक जीत लिया है। लंदन ओलिंपिक में भारत का यह पांचवां पदक है। योगेश्वर ने लंदन में देश को पांचवां और कुश्ती में पहला पदक दिलाया। उन्होंने कुश्ती के 60 किलोग्राम फ्रीस्टाइल में उत्तर कोरिया के जॉग मियांग री को 3-1 से हराकर भारत को यह ख़ुशी दी। योगेश्वर के पदक जीतने पर हरियाणा सरकार एक करोड़ रुपये का ईनाम देगी। तमिलनाडु सरकार 50 लाख रुपये, खेल मंत्रालय 20 लाख रुपये, सैमसंग और ओएनजीसी 10-10 लाख रुपये जबकि सहारा 2 किलो सोने का पदक देगा। एक घंटे में तीन कुश्तियां शानदार तरीके से जीतते हुए भारत के योगेश्वर दत्त ने 60 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में कांस्य पदक जीत लिया। भारत की उम्मीदों के कर्णधार और महाबली सतपाल के होनहार शिष्य योगेश्वर दत्त ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए उत्तर कोरिया के जोंग म्योंग री को हराया। योगेश्वर ने रेपेचेज राउंड में जॉन मियांग को अपनी फितले टेक्निक से ऐसा फंसाया कि कोरियाई पहलवान संभल नहीं सके।
योगेश्वर ने क्वालिफिकेशन राउंड में बुल्गारिया के अनातोली इलारियोनोविच गुइदिया को 3-1 से हराया। प्री-क्वार्टर फाइनल में वे चार बार के विश्व चैम्पियन रुस के बैसिक कुदुखोव से 0-3 से हार गए थे। रुसी पहलवान के फाइनल में पहुंचने के कारण योगेश्वर को कांस्य पदक के लिए रेपेचेज में खेलने का मौका मिला।
भारतीय पहलवान ने रेपेचेज में पोर्टरिको के फ्रेंकलिन गोमेज मातोस, ईरान के इस्माइल पुरजोईबारी मसूद और उत्तर कोरिया के म्योंग को धूल चटाते हुए इतिहास रच दिया। योगेश्वर ओलिंपिक इतिहास में कांस्य पदक जीतने वाले तीसरे भारतीय पहलवान बन गए हैं। केडी जाधव ने 1952 के ओलंपिक में और सुशील ने 2008 के ओलिंपिक में कांस्य पदक जीते थे। सुशील ने भी चार साल पहले रेपेचेज में ही कांस्य पदक जीता था।
महाबली सतपाल ने ओलिंपिक से पहले वादा किया था कि उनके शिष्य इस बार ओलिंपिक में पदक जरुर जीतेंगे। योगेश्वर ने यह वादा तो पूरा कर दिया और अब सुशील की बारी है जो कल 66 किलोग्राम वर्ग में उतरेंगे।
लंदन में योगेश्वर की यह दूसरी पदक सफलता है। इससे पहले वे लंदन में ही 2003 में कॉमनवेल्थ कुश्ती का स्वर्ण पदक जीते थे। योगेश्वर ने अपने तीसरे ओलंपिक में पदक जीतने का सपना पूरा किया और पिछले बीजिंग ओलिंपिक में अपने गुरुभाई सुशील कुमार की कांस्य पदक की सफलता को दोहरा दिया। बीजिंग में योगेश्वर क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे थे जबकि एथेंस में प्रदर्शन ठीक नहीं था।
योगेश्वर की अन्य उपलब्धियां स्वर्ण पदक :
कॉमनवेल्थ गेम्स, नई दिल्ली-2010 स्वर्ण पदक : कॉमनवेल्थ कुश्ती, लंदन-2003 स्वर्ण पदक : एशियन चैंपियनशिप, गूमी (द.कोरिया) -२०१२ योगेश्वर दत्त ने इस बार खुद से वादा किया था कि कुछ भी हो ओलिंपिक से खाली हाथ नहीं लौटना। अपने वादे पर वे खरे उतरे। योगेश्वर दत्त ने जीत अपनी मां एवं स्व. पिता को समर्पित की। योगेश्वर ने कहा कि यह देशवासियों की दुआओं का ही कमाल था कि वह ओलंपिक में पदक जीतने में सफल रहे। योगी ने कहा, इस जीत के मायने मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता। यही कारण था कि जीत के बाद मैं खुद पर काबू नहीं रख पाया और रिंग में उछलने-कूदने लगा। मैं निर्णायक मुकाबले में सिर्फ इसलिए जीत सका क्योंकि अंत तक खुद पर काबू रखा। मैं अपने देश वासियों के साथ इस जीत के जश्न का इंतजार कर रहा हूं।’
लंदन में योगेश्वर दांव पेंच आजमा रहे थे। वहीं भारत में उनके परिजन मंदिर में बैठकर उनकी जीत की पूजा अर्चना कर रहे थे। योगेश्वर के भाई मुकेश ने एक चैनल को बताया कि हम उनका मैच नहीं देख रहे थे, बल्कि मंदिर में बैठकर जीत के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे थे। भगवान ने हमारी प्रार्थना सुन ली। उनका स्वदेश वापसी पर जोरदार स्वागत किया जाएगा। दिल्ली से सोनीपत और सोनीपत से योगेश्वर के गांव भैंसवाल कलां तक जुलूस निकाला जाएगा।

