नई दिल्ली [ इंटरनेट डेस्क ] इस साल मई में संजय जोशी को आउट और नरेंद्र मोदी को इन करने को लेकर चर्चित रही नैशनल एग्ज़ेक्युटिव के बाद अब बुधवार से दिल्ली के पास सूरजकुंड में फिर इसका आयोजन हो रहा है। इस एग्ज़ेक्युटिव के बाद दो दिन के लिए पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की भी बैठक होने जा रही है। माना जा रहा है कि गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव से ऐन पहले होने जा रही इस बैठक में पार्टी कई बड़े फैसले ले सकती है। हालांकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल बढ़ाने संबंधी संविधान संशोधन के बारे में मुंबई की बैठक में ही फैसला कर लिया गया था लेकिन इस बार काउंसिल की बैठक में इस फैसले पर मुहर लग सकती है। बीजेपी अपनी एग्ज़ेक्युटिव और काउंसिल दोनों में ही सबसे ज्यादा जोर मध्यावधि चुनाव की संभावनाओं पर देने की तैयारी में है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि मध्यावधि चुनाव इस साल होंगे या अगले साल, यह भले ही तय न हों लेकिन पार्टी को लगता है कि मध्यावधि चुनाव तय वक्त से पहले होंगे। ऐसे में पार्टी इस चुनौती पर चर्चा करेगी कि किस तरह से यूपीए सरकार विरोधी माहौल को कायम रखा जाए। काउंसिल में चूंकि देश भर से पार्टी के एक हजार प्रतिनिधि शामिल होंगे इसलिए पार्टी इन कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि वे किसी भी वक्त चुनाव के लिए तैयार रहें और सरकार की करतूतों को जनता के बीच जोर-शोर से लेकर जाएं।
इस बार पार्टी नेताओं में चर्चा का मुख्य केंद्र हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभाओं के चुनाव रह सकते हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इसी बैठक में इन दोनों ही राज्यों के चुनाव जीतने के लिए रणनीति बनाई जाएगी। एग्ज़ेक्युटिव में यह भी लगभग तय है कि केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार के मुद्दों को किस तरह से हाईलाइट करके उसे घेरा जाए। पार्टी नेताओं का मानना है कि बैठक में कोशिश की जाएगी कि केंद्र सरकार के जिन फैसलों का बीजेपी विरोध कर रही है, उस पर पार्टी में एकजुटता रहे।

