नई दिल्ली [ इंटरनेट डेस्क ] कोयला ब्लॉक आवंटन के मुद्दे पर विपक्षी पार्टियों, टीम अन्ना और बाबा रामदेव के बाद अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भी केंद्र सरकार पर हमला बोल दिया है। इस मुद्दे पर आरएसएस ने कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि देश उसकी जागीर नहीं है जो वह मनमाने तरीके से सरकारी खजाने की लूट करे और देश की जनता आंखें मूंद सबकुछ देखती रहे।
प्रधानमंत्री गठबंधन की मजबूरी की आड़ लेकर अब तक सफाई देते रहे हैं, लेकिन कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला तो स्वयं प्रधानमंत्री के कोयला मंत्रालय के प्रभारी रहते हुआ, तो दोष सीएजी के मत्थे क्यों मढ़ा जा रहा है? वास्तव में इसके लिए प्रधानमंत्री प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार हैं। इससे बौखलाई कांग्रेस विपक्ष पर बहस से भागने का आरोप लगा रही है।
संघ ने प्रधानमंत्री पर खुलकर हमला करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री जब लोकसभा में जवाब देने आए तो उन्होंने तथ्यों को रखने की बजाय विपक्ष और सीएजी पर निशाना साधकर अपनी बेगुनाही साबित करने की कोशिश की। स्वयं कांग्रेस ने भी बीजेपी और सीएजी के प्रति ही अपनी तल्खी दिखाई और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इसके विरोध में पार्टी के सड़कों पर उतरने का ऐलान कर दिया। वह भूल रही हैं कि देश उनकी असलियत जान गया है और वह इस भ्रष्टाचारी सरकार को माफ करने के लिए कतई तैयार नहीं है, क्योंकि इस सरकार की न देश में आस्था है और न ही देश के संविधान में।
सरकार के इस रुख से साफ है कि वह चाहती है कि संवैधानिक संस्थाएं अपने स्वायत्त स्वरूप को छोड़कर कांग्रेस के राजनीतिक हितों की पैरवी करें और इसके लिए अपने इस्तेमाल पर भी वह आंखें मूंद लें। जनता को पता है कि कांग्रेस के लिए कब किसको डराना है और कब किसके विरुद्ध चुप बैठ जाना है। यह खेल सीबीआई के माध्यम से मनमोहन सिंह सरकार खूब खेल रही है। मुलायम सिंह यादव और मायावती तो इसके ताजा उदाहरण हैं।

