इंदौर [ NI 24 ] एक तरफ जहां सरकार देहदान के लिए आम नागरिकों को प्रेरित कर रही है वहीं दूसरी तरफ देहदान की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। दरअसल एम वाय में इन्दौर के जिला जज को एक करीबी की का देहदान करने के लिए घंटे भर से ज्यादा इंतजार करना पड़ा। इतना ही नही जिला जज के साथ चीफ ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट व एडीजे को भी एम वाय के ढिलपुल रवैये के चलते घंटो इन्तजार करना पड़ा तब कहीं जाकर देहदान किया जा सका।
देहदान की प्रकि्रया में लापरवाहियों के इस सिलसिले की कहानी शुरू होती है डाक्टर लक्ष्मणसिंह नौलाना से। नौलाना के परिजनों के मुताबिक वे डाक्टर लक्ष्मणसिंह को मृत अवस्था में लेकर एम वाय पंहुचे थे और देहदान करना चाहते थे। लेकिन जब यहां आकर प्रक्रिया में ढीलपोल देखी गई तो उन्होनें अपने करीबी जिला जज सुरेन्द्र भदौरिया, सीजेएम प्रियदर्शन शर्मा, व एडीजे संजीव गुप्ता से बात की। वहीं तीनों जजों के एम वाय आने के बाद भी शव को एम वाय प्रबन्धन ने गंभरीता से नही लिया और अपना ढिलपुल रवैया जारी रखा। मृतक डाक्टर लक्ष्मणसिंह के रिश्तेदार सी पी सिंह ने बातचीत में बताया कि लक्ष्मणसिंह फिलहाल साकेत में रह रहे थे और वे रिटायर्ड कृषि वैज्ञानिक थे। जो अमेरिका और अन्य देशों में अपनी सेवाऐं देने के बाद इंदौर आए थे। सामान्य मृत्यु के बाद उनके शरीर को एम वाय अस्पताल में दान देने में आई कठिनाई से परेशानी होने की बात भी सिंह ने कही। साथ ही सिंह ने कहा कि जब तीन जजों को घंटे भर से ज्यादा इंतजार करना पड सकता है तो भला आम आदमी की क्या बिसात और ऐसे में एम वाय प्रबन्धन से क्या उम्मीद की जा सकती है।
जिला जज के एम वाय पहुचने की खबर लगते ही एमवाय अधीक्षक डाक्टर पीएस ठाकुर भी केज्युअल्टी पंहुचे। हालांकि अधीक्षक ने इंतजार करवाने की बात से इंकार किया और केवल इतना ही कहा कि जबतक संबंधित व्यक्ति की मृत्यु की प्रमाणिकता नही जांच ली जाती देहदान की प्रक्रिया नही की जा सकती।
बहरहाल देहदान करने के लिए सरकार कितने ही नारे लगाए लेकिन इस घटना से इतना तो साफ हो चुका है कि अगर एक व्यक्ति की देहदान के लिए तीन जजों को एम वाय आना पड़े तो यह एम वाय के ढीले रवैयै का अपने आप में सबसे बड़ा सबूत है। और जब खुद न्याय के मंदिर कहे जाने वाले न्यायधीश परेशान हो तो भला आम आदमी की एम वाय में आने की क्यों हिम्मत होगी इसका जवाब एम वाय प्रबन्धन को ही आने वाले वक्त में देना होगा।

