आरक्षित यात्रियों को ट्रेन में अपना आइडेंटिटी प्रूफ साथ रखना होगा

नई दिल्ली [ इंटरनेट डेस्क ] रेल यात्रियों के लिए शनिवार से एक और समस्या बढ़ने वाली है। अगर वे आरक्षित टिकट लेकर यात्रा करने जा रहे हैं तो उन्हें अपना आइडेंटिटी प्रूफ भी साथ लेकर चलना होगा। दलालों का दबदबा खत्म करने के नाम पर रेल मंत्रालय 1 दिसंबर से एक नई शर्त लागू कर रहा है। यह शर्त आम आदमी के लिए मुसीबत बन सकती है।

रेलवे बोर्ड के मुताबिक, 1 दिसंबर 2012 से हर श्रेणी के आरक्षित टिकट पर पहचान पत्र साथ रखना होगा। अभी तक सिर्फ एसी और उच्च श्रेणी के यात्रियों के लिए ही यह बाध्यता थी लेकिन अब स्लीपर से लेकर एसी, हर श्रेणी के यात्रियों को अपना पहचान पत्र साथ रखकर चलना होगा। रेलवे बोर्ड का दावा है कि यह कदम उन दलालों पर अंकुश लगाने के लिए लगाया जा रहा है जो पहले अलग-अलग नामों से टिकट आरक्षित करा लेते हैं। बाद में उन्हें उन यात्रियों को ऊंचे दामों पर बेच देते हैं जो मजबूरी में तत्काल यात्रा करना चाहते हैं। ये दलाल यात्री की उम्र देखकर उसे दूसरे के नाम का टिकट पकड़ा देते हैं।

रेलवे का मानना है कि इस फैसले से दलालों पर रोक लगेगी। लेकिन, रेलवे बोर्ड का यह फैसला आम आदमी पर भारी पड़ सकता है। दूसरी श्रेणी में आरक्षित टिकट लेकर आराम से यात्रा करने वाले आम यात्रियों को अब अपनी पहचान बतानी होगी। ऐसे में शहरों में छोटे काम करने के लिए आने वाले वे लोग प्रभावित होंगे जिनके पास कोई पहचान पत्र ही नहीं होता है। घरों में काम करने वाले या शहरों में छोटे मोटे काम करके पेट पालने वाले लोगों में ज्यादातर ऐसे हैं जिनके पास रेलवे द्वारा पहचान के लिए निर्धारित किए गए दस्तावेजों में से एक भी नहीं होगा। वह या तो शोषण के शिकार होंगे या फिर फिर उन्हें भेड़ बकरियों की तरह अनारक्षित डिब्बों में यात्रा करनी होगी।

खुद रेलवे बोर्ड के अधिकारी इस फैसले से सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि द्वितीय श्रेणी में पहचान अनिवार्य करना आम आदमी की समस्या बढ़ाएगा। उनका कहना है कि एक ट्रेन में मात्र कुछ टिकटों के लिए सैकड़ों यात्रियों पर दबाव बनाना उचित नहीं माना जा सकता।

इस नई शर्त से आम आदमी भी परेशान है। नई दिल्ली में एक छोटी दुकान पर काम करने वाले रामनिवास का कहना है कि अब घर जाना और कठिन हो जाएगा। बिहार के रोहताश जिले के रहने वाले रामनिवास के मुताबिक अभी तक तो महीनों पहले टिकट रिजर्व कराने की समस्या थी। अब टिकट के साथ पहचान पत्र कहां से लाएंगे। झारखंड के मूल निवासी राकेश कुमार सिंह कहते हैं कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन गरीब यात्रियों पर पड़ने वाला है जो बड़े शहरों में छोटे-छोटे काम करके अपना पेट पालते हैं। रेलवे को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए या फिर पहचान पत्र का दायरा बढ़ाना चाहिए।

  • Related Posts

    पूर्व आर्मी चीफ जनरल वी के सिंह के घर में चोरी

    नई दिल्ली [ इंटनेट डेस्क ] पूर्व आर्मी चीफ जनरल वी के सिंह के घर में चोरी की कोशिश नाकाम किए जाने की खबर है। दो-तीन लोग चोरी के मकसद…

    कौन बनेगा करोड पति : सुरमीत कौर ने जीते पांच करोड़

    मुंबई [ NI 24 ] मशहूर गेम शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में मुंबई की एक गृहिणी इस सीजन में पांच करोड़ रुपये जीतने में सफल रही। सुरमीत कौर (37) ने…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    आम आदमी का अपने घर का सपना साकार करना ही योजना का लक्ष्य-श्री जैन

    मुनी श्री पर हुए हमले को लेकर जैन समाज का धरना प्रदर्शन

    होल्कर साईंस कॉलेज में विज्ञान मेले का आयोजन

    पूर्व आर्मी चीफ जनरल वी के सिंह के घर में चोरी

    कौन बनेगा करोड पति : सुरमीत कौर ने जीते पांच करोड़

    कमिश्नर की गाडी से एक्सीडेंट