इंदौर [ NI 24 ] रविवार रात शहर के जाने माने काग्रेसी नेताओं और बिल्डरों के बच्चो में कॉफ़ी शाप पर हुआ विवाद इतना बड़ा की बात थाने तक जा पहुची | लेकिन थाने पर भी काग्रेसी नेता और पुलिस के दबाव के चलते पीड़ित को न्याय ही नहीं मिल पाया और पुलिस ने दोनों पक्षों में राजीनामा करवा दिया |
बच्चों में हुए विवाद के चलते थाने पर कांग्रेसी नेता पंकज संघवी ,बिल्डर शरद डोसी , अतुल सेठ सहित कई लोग पहुचे थे | दरअसल एक कॉफ़ी शाप पर कांग्रेसी नेता पंकज संघवी के बेटे कुणाल संघवी और बिल्डर शरद डोसी के बेटे सिद्धार्थ ने मानस अरोरा को सिगरेट से जला दिया था | इस बात पर दोनों पक्षों में विवाद हुआ तो कांग्रेसी नेता पंकज संघवी के बेटे कुणाल संघवी और बिल्डर शरद डोसी के बेटे सिद्धार्थ ने मानस अरोरा की जमकर पिटाई कर दी थी | जिसकी शिकायत करने मानस तुकोगंज थाने पंहुचा था |
लेकिन जब इस बात की भनक पंकज संघवी और बिल्डर शरद डोसी को लगी तो वो भी अपने साथियों के साथ थाने पहुच गये और पुलिस पर दबाव बनाने लगे ताकि उनके बेटो के खिलाफ मामल दर्ज न हो | पूरा हाई प्रोफाइल मामला करीब 2 घंटो तक थाने पर चलता रहा और अंत में कांग्रेसी नेता पंकज संघवी पुलिस और मारपीट का शिकार हुए मानस पर दबाव बनाने में कामियाब रहे और बगैर रिपोर्ट के ही मामला खत्म करवा दिया |
जब पुरे मामले को लेकर काग्रेसी नेता से बात की तो वो पुरे विवाद को बच्चो का झगडा बताने लगे | पुरे घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध रही | क्योकि छोटे-छोटे विवादों की तुरंत रिपोर्ट दर्ज करने वाली इंदौर पुलिस ने दो घंटे तक पुरे मामले में कोई रिपोर्ट ही नहीं दर्ज की और नहीं पुलिस ने मानस की एक न सुनी |
पुलिस ने भी पुरे मामले को सधारण झगडे में बदलकर मानस पर दबाव बनाया और राजीनामा करवा दिया |
भले ही काग्रेसी नेता और बिल्डर पुलिस पर दबाव बनाकर मामले में राजीनामा करवाने में सफल रहे हो | लेकिन ये जिस तरह रईसजादों के बीच विवाद हुआ उससे साफ़ जाहिर हो रहा है कि आगे भी वो इस तरह की हरकतों को अंजाम दे सकते है | क्योकि परिजनों की इस तरह की दरियादिली के चलते ही कई रईसजादे अपराधी बन जाते है |

