खंडवा [ TNN ] ग्राम घोघलगांव में जारी सत्याग्रह आज 11 वे दिन में प्रवेश कर गया। 51 महिला पुरूष, नर्मदा आंदोलन की पुमख कार्यकर्ता सुश्री चित्तरूपा पालित के साथ लगातार पानी में बैठे हैं। सभी की मांग हैं कि डूब लाने के पूर्व पुनर्वास की कारवाही पूरी करनी चाहिए। सरकार द्वारा प्रभवितों की मांगो पर कारवाही न करने के खिलाप अगामी 8 सितंबर को भोपाल में विशाल प्रदर्शन किया जायेगा।
पिछले 11 दिनों से निरतंर ‘जल सत्याग्रह’ कर रहे विस्थापितों की मांग पर कोई ठोस निर्णय न दिये जाने के खिलाप आगामी 8 सितंबर को भोपाल में विशाल प्रदर्शन किया जायेगा। पूर्व में 6 सितंबर को आयोजित इस प्रदर्शन को अब 8 सितंबर को करने का निर्णय लिया गया है। इस प्रदर्शन में बडी संख्या में ओंकारेश्वर एवं इंदिरा सागर के प्रभावित महिला पुरूष भाग लेगे।
उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व विस्थापितो के साथ प्रमुख सचिव नर्मदा विकास विभाग एवं कलेक्टर खण्डवा से दो चर्चाओं के बाद कई मुद्दो पर सरकार ने कोई ठोस निर्णय नही लिया है।
क्या कहता हैं सर्वोच्च न्यायालय:
डूब के पहले पुनर्वास पूरा होना चाहिए, इस विषय में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट आदेश दिये गये हैं। ओंकारेश्वर बांध के 11 मई 2011 के आदेश में न्यायालय में कहा गया हैं कि ‘‘पुनर्वास नीति के प्रावधानो का पालन नही हुआ है और पुनर्वास की कार्यवाही बांध निर्माण के पहले होनी चाहिए’’। उल्लेखनीय हैं कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने 13 मई 2009 के आदेश में ओंकारेश्वर बांध 189 मीटर से 193 मीटर तक पानी भरने की अनुमति इस आधार पर नही दी थी कि विस्थापितों को जमीन दिया जाना शेष हैं एवं शिकायत निवारण प्राधिकरण के समस्त अनेक प्रकरण लंबित है। आज शिकायत निवारण प्राधिकरण के 450 ओदशों के अनुसार सभी विस्थापितों को जमीन दिया जाना शेष हैं एवं शिकायत निवारण प्राधिकरण द्वारा जमीनो के शेष आवेदनों पर सुनवाई जारी है। अतः 189 मीटर के उपर डूब नही लाई जा सकती है। सर्वोच्च न्यायालय के तीन ओदशो (बी.डी. शर्मा विरूद्ध केन्द्र सरकार,1992 ; एन.डी. जयाल विरूद्ध केन्द्र सरकार,2004 ; नर्मदा बचाओ आंदोलन विरूद्ध केन्द्र सरकार,2005) में सवोच्च न्यायाल्य ने स्पष्ट ओदश दिया है कि विस्थापितो का पुनर्वास डूब लाने से 6 माह पुर्व किया जाये।
ग्राम घोघलगांव में जल सत्याग्रह में अनेक संगठनों के प्रतिनिधि लगातार शामिल हो रहे हैं। इनमें भोपाल से मध्य प्रदेश महिला मंच, मुस्कान, भोपाल गैस पिडित संगठन, युवा-संवाद आदि संगठनो के प्रतिनिधियों ने सत्याग्रह स्थल पर पहुचकर संघर्ष को समर्थन व्यक्त किया।

