मुंबई [इंटरनेट डेस्क ] मुंबई में सरकार विरोधी भीड़ हिंसक हो गई।दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में करीब 50000 लोग जुटे थे। वे असम और म्यांमार में हुई हिंसा का विरोध कर रहे थे। लेकिन उनमें से कुछ लोग अचानक हिंसक हो गए। उन्होंने मीडिया और पुलिस की गाडि़यों में आग लगा दी।
भीड़ ने मैदान से बाहर निकलकर पहले रास्ता रोकने की कोशिश की और उसके बाद कई गाड़ियों को आग लगा दी। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। मुंबई पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय बलों के जवानों को भी बुलाया गया। पुलिस ने हालात काबू में करने के लिए फायरिंग भी की। फिलहाल स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में कर लिया गया है।
भीड़ ने चार न्यूज चैनलों के ओवी वैन जला दिए। दो फोटोग्राफर गंभीर रूप से घायल हुए हैं। कुछ रिपोर्टर भी घायल हैं। फिलहाल मुंबई के आजाद मैदान के आसपास के इलाकों में हालात तनावपू्र्ण बने हुए हैं।
मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेंद्र भाटी ने कहा, ‘कुछ शरारती तत्वों ने हिंसा शुरु की। अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में हैं और चिंता की कोई बात नहीं है। मैं मीडिया के माध्यम से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करता हूं।’
महाराष्ट्र के गृहमंत्री आरआर पाटिल ने कहा, ‘अभी मुंबई के हालात पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। मैं लोगों से अपील करूंगा कि शांति बनाए रखे। हिंसा की निंदा करने के लिए लोग इकट्ठा हुए थे हिंसा करने के लिए नहीं। पुलिस और हमारा प्राथमिक कर्तव्य हालात को नियंत्रण में करना है। असम की हिंसा को लेकर बैठक बुलाई थी लेकिन वो खुद हिंसक हो गए। इस पूरे मामले की जांच हम जरूर करेंगे। लोग अफवाहों पर विश्वास न करें। मुंबई इस वक्त पूरी तरह सामान्य है।’
असम और बर्मा में मुसलमानों पर हो रहे जुल्म के विरोध में प्रदर्शन हो रहा था। कुछ नौजवान आजाद मैदान में घुंसने की कोशिश कर रहे थे जिन्हें पुलिस ने रोका जिसके बाद माहौल हिंसक हो गया। बर्मा और कोकराझार में हुए कत्लेआम की तस्वीरें इंटरनेट पर आने के बाद लोगों में गुस्सा था। लोगों में मीडिया के प्रति भी गुस्सा था जो गलत रूप में भड़का। जो हुआ वो गलत हुआ। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री छगन भुजबल ने कहा, ‘कई तरह की अफवाहों भी उठ रही हैं। सबसे पहली जरूरत अफवाहों पर काबू करने और शांति बरतने की है। सभी धर्मों के लोगों को शांति बरतनी चाहिए।’

