नई दिल्ली [NI24] गुरुवार को असम में एक बार फिर हिंसा भड़क गई है। और इस हिंसा ने सरकार के उस ऐलान को धता बता दिया जिसमे केंद्र सरकार ने ऐलान किया था कि नॉर्थ-ईस्ट के लोगों को देश में कहीं भी किसी तरह का खतरा नहीं है। गुरुवार के दिन हिंसा असम के बक्शा और कामरूप जिलों में हुई है। यहां बलवाइयों और पुलिस में झड़प होने से कई लोग घायल हुए हैं। हालाँकि हालात काबू में करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स और सेना तैनात की गई है।
खबर है कि गुरुवार की हिंसा बुधवार रात एक शख्स पर हुए हमले के जवाब में हुआ है। बुधवार की रात बक्शा में एक व्यक्ति पर हमला हुआ और एक नैनो कार जला दी गई। गुरुवार को भीड़ ने लकड़ी के पुल और बसों को आग के हवाले कर दिया है। कोकराझार के पास के जिले बक्सा में तीन गाड़ी में आग लगाई गई। इसके अलावा लकड़ी के एक पुल को आग के हवाले कर दिया गया।
नॉर्थ-ईस्ट के छात्रों को धमकी भरे संदेश मिल रहे
इस बीच, भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा है कि देश के कई शहरों में रह रहे नॉर्थ-ईस्ट के छात्रों को धमकी भरे संदेश मिल रहे हैं। उनसे कहा जा रहा है कि वे या तो शहर छोड़ दें या हिंसा झेलने के लिए तैयार रहें। स्वराज ने इस बारे में सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
लेकिन केंद्र सरकार का कहना है कि इस तरह की बातों में कोई दम नहीं है। सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। स्वराज ने केंद्र की कांग्रेस सरकार को हाथे आड़े लिया है।
स्वराज ने कहा कि हमारे नेताओं को असम के लोगों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना चाहिए। साथ में सरकार को उचित कदम उठाना चाहिए। भाजपा की इस नेता ने कहा कि असम के लोगों की रक्षा एबीवीपी करेगी। दूसरी ओर, बेंगलुरू में आरएसएस के कार्यकर्ता स्टेशन पर लोगों को समझाने का काम कर रहे हैं।

