शिवपुरी [ विनय धोलपुरिया ] सुरवाया के दबंग गुर्जर के यहां आरोपित तौर पर बंधक बनी अपनी पत्नि और बेटी की रिहाई की आश सब दरवाजे खटखटाने के बाद पूरी तरह छोड चुके पति-पिता मुकेश सोनी आत्महत्या के लिए मजबूर हो गया है। एक हस्ताक्षरित आवेदन में पीडि़त मुकेश सोनी ने कहा है कि सभी जिम्मेदारों (पुलिस-नेता) के यहां से उसे उपेक्षा और असुनवाई ही हाथ लगी है ऐसी स्थिति में उसके जीने का कोई मतलब नहीं है। यदि 3 दिन के अंदर उसकी पत्नि सविता और बेटी शिवानी दबंगों के चंगुल से मुक्त नहीं कराई जाती है तो वह आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाएगा। सनद रहे 27 दिन पहले 30 नवम्बर को सुरवाया के दबंग गुर्जर सहराने में स्थित दुकान से सविता को उसकी दो वर्षीय बच्ची शिवानी के साथ दम से उठाकर ले गए।
मां-बेटी को उठाने का काम दिन दहाडे दबंगों द्वारा अंजाम दिया गया और दुकान में रखा माल मत्ता भी जूते के जोर पर चैडे धाडे समेट लिया गया। सविता के पति को जब इस सनसनीखेज घटना की जानकारी दुकान पहुंचने पर उसके पुत्र अतुल सोनी ने यह बताकर दी कि गांव का दबंग गुर्जर अपने पांच-छह साथियों के साथ दुकान पर आया था और मां-बहिन को उठाकर ले गया। नामजद सूचना पर सविता का पति मुकेश सोनी दबंगों के घर अपनी पत्नि और बेटी को मुक्त कर देने की फरियाद लेकर पहुंचा जहां से उसे धक्का देकर भगा दिया और साथ ही यह चेतावनी भी दे डाली कि अब तेरी जहां मर्जी आए वहां हमारी शिकायत कर आ कोई भी हमारा बाल बांका नहीं कर सकता।
दिन दहाडे अंजाम दी गई उपरोक्त घटना का सनीसनीखेज पहलू यह है कि इस मामले में दबंगों से मिली दुत्कार के बाद मुकेश सोनी सुरवाया थाने में रिपोर्ट करने पहुंचा जहां उसकी रिपोर्ट लिखने में थानेदार ने कोई रूचि नहीं दिखाई। थाने से असुनवाई के बाद शिवपुरी एसपी कार्यालय में पति ने अपनी पीर सुनाई जिस पर करैरा एसडीओपी से संपर्क करने का मशवरा उसे मिला। करैरा एसडीओपी ने सुरवाया थाने को रिपोर्ट लिखने की हिदायद देने के साथ कार्रवाई करने की बात भी फोन पर कही। आला अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद सुरवाया थाने में जिस अंदाज में फरियादी पति-पिता की रिपोर्ट लिखी वह पुलिस की मनमानी और उसकी कार गुजारी को उजागर करने वाला तथ्य है। अशिक्षित फरियादी मामला कुछ और बता रहा था और पुलिस कुछ और लिख रही थी। जानकार आश्चर्य होगा लेकिन पुलिस ने कथित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर न फाडकर आदम चैक काटा जिसमें लिखा कि फरियादी ने थाने में यह सूचना दी है कि कल्लू गुर्जर के साथ उसकी पत्नि स्वेच्छा से चली गई है।
यह वह इबारत है जो इस सच्चाई को बेपर्दा करती है कि पुलिस आरोपित तौर पर कथित आरोपियों के साथ सांठ-गांठ कर चुकी है। पीडि़त को न्याय दिलाने और नामजद आरोपियों पर कार्रवाई करने का पुलिस का कोई मन कतई नहीं है। पुलिस से पूरी तरह असुनवाई का दंश लेकर लौटा पति मुकेश सोनी अपनी व्यथा-कथा लेकर विधायक माखनलाल राठौर के पास पहुंचा यहां कथित तौर पर सत्ताधारी दल के विधायक ने सीधे एसपी से संपर्क साधा और उन्हें यह जबाव मिला कि मामले की छानबीन चल रही है। शीघ्र ही नतीजे सामने आ जाएंगे। इस आश्वासन के बाद दिन पर दिन बीतते गए और आज 27 दिन गुजर चुके हैं लेकिन पीडि़त को अपनी पत्नि और बेटी के दर्शन भी दूभर हैं।
असुनवाई और अंधेरगर्दी में नामजद आरोपियों के चंगुल से मुक्त नहीं हो रही मां-बेटी
गांव के दबंग व्यवस्था के इस मिटोने पर मचमचाकर अपनी दबंगआई की धांक जमा रहे हैं और पीडि़त के सुनवाई आवेदन का स्तर बढ़ता ही जा रहा है। थाने से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक पीडि़त अपनी शिकायत प्रेषित कर चुका है लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं है। असुनवाई से बुरी तरह आहत पति-पिता मुकेश सोनी ने एक हस्ताक्षरित आवेदन आचरण कार्यालय को सौंपते हुए कहा है कि यदि तीन दिन के अंदर उसकी पत्नि और बेटी उसे वापिस नहीं मिलती है तो वह अपने बचे परिवार के साथ आत्म हत्या करने के लिए मजबूर हो जाएगा। पीडि़त का कहना है कि दुनिया के सभी दरवाजे बेमानी है गरीब की और कमजोर की कहीं सुनवाई नहीं है। दबंगों की दम और उनका पैसा उनकी आवाज को नक्कारखाने में तूती की तरह दबा रहा है। न्याय की आश में उन्होंने सभी दरवाजे खटखटा लिए हैं पुलिस-प्रशासन और सत्ताधारी नेता भी उसे न्याय दिलाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं ऐसी स्थिति में उसके पास आत्महत्या के अतिरिक्त कोई और चारा नहीं रहा है। पीडि़त पति-पिता ने समाज के सभी जिम्मेदार लोगों से हाथ जोडकर विनम्र निवेदन करते हुए कहा है कि यदि कोई जिम्मेदार व्यक्ति उसकी पत्नि और बेटी को दबंगों से मुक्त कराने में मदद कर सकता है तो मानवता की खातिर जरूर करे। पीडि़त पति का आरोप है कि गांव के ही दबंग के घर में उसकी पत्नि-बेटी जबरिया धर ली गई है। शिकायत करने के बाद मेरा भी गांव में दुकान करना मुश्किल हो गया है। दुकान बंद डली है, मेरा परिवार भूखा मरने की कगार पर है। बच्चे मां के लिए बिलख रहे हैं उनकी यह दशा और मेरी दयनीय स्थिति जीवित रहने योग्य कतई नहीं है। उन्होंने जिला कलेक्टर, भाजपा जिलाध्यक्ष, समस्त विधायक एवं मंत्रियों और मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए कहा है कि यदि उसे तीन दिन के अंदर न्याय नहीं मिला तो वह अन्याय सहने की क्षमता खो देगा और आत्म हत्या के लिए मजबूर हो जाएगा।
पीडि़त पति के मामले में जहां सत्ता पक्ष के नुमाइंदे नौकरशाही के भरोसे पर टिके हुए हैं वहीं मुख्य विपक्षी दल इस जीवंत मुद्दे की बड़ी अनदेखी करने के लिए आरोपित है। कानून व्यवस्था की उड़ी धज्जियां और दबंगों के यहां बंधक बनी मां-बेटी का मामला कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ा मुद्दा हो सकता है लेकिन बेखबर कांग्रेस का कोई भी नेता कार्यकर्ता इस मामले में नामालूम कारणों से हाथ डालता दिखाई नही दे रहा है।

