भोपाल [ इंटरनेट डेस्क ] भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन गडकरी ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और आध्यात्मिक संत विवेकानंद के आईक्यू (IQ) को एक समान बताकर कर एक बार फिर विवादों को हवा दे दी है। एक स्थानीय पत्रिका ‘ओजस्विनी’ की ओर से आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए गडकरी ने साइकॉलजी के आधार पर बुद्धि नापने का पैमाना का हवाला देते हुए कहा, ‘यदि दाऊद और विवेकानंद के आईक्यू को देखा जाए, तो एक समान है ! लेकिन एक ने इसका उपयोग गुनाह के लिए किया और दूसरे ने समाज के लिए।’
कांग्रेस ने गडकरी से इस बयान पर माफी मांगने के लिए कहा है। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने सोमवार सुबह ट्वीट कर गडकरी के बयान पर चुटकी लेते हुए कहा, ‘स्वामी विवेकानंद और दाऊद का आईक्यू एक जैसा है.. मोदी और उनके समर्थकों की इस पर क्या राय है?’
गडकरी ने कहा कि आईक्यू के बल पर नारी शक्ति ने अवसर मिलने पर खुद को श्रेष्ठ साबित किया है, लेकिन लंबे समय से समाज में धर्म, जाति, भाषा, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव होता रहा है,यह समाप्त करना होगा। विवेकानंद का उदाहरण देते हुए गडकरी ने कहा कि 21वीं सदी भारत की सदी होगी। उन्होंने कहा कि अठारहवीं सदी मुगलों, उन्नीसवीं सदी ब्रिटेन साम्राज्यवादी और बीसवीं सदी अमेरिका के उत्थान की थी, उसी प्रकार इस बात में कोई संदेह नहीं है कि इक्कीसवीं सदी भारत की होगी और इसमें महिलाओं की क्षमताओं को उल्लेखनीय योगदान होगा। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे इस मानसिकता से बाहर निकलें कि लिंग के आधार पर वे कमजोर हैं। पुरुष शक्ति का दायरा जहां खत्म होता है, वहीं उसे प्रकृति यानी नारी शक्ति का ही सहारा लेना पड़ता है। इसके लिए उन्होंने काली, दुर्गा और कई शक्तियों का उदाहरण दिया, जिन्होंने देवताओं के पराजित होने पर शुम्भ-निशुम्भ, महिषासुर आदि बुरी ताकतों का अंत किया।
गडकरी ने कहा कि महिलाएं आज कई क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन फिर भी समाज में मौजूद रूढ़ियों को बदलने की जरूरत है। व्यक्ति की गुणवत्ता और बुद्धिमत्ता का कोई संबंध जाति, धर्म और लिंग से नहीं होता है। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष प्रभात झा के साथ समाज के कई क्षेत्रों में उपलब्धि हासिल करने वाली महिलाओं को ‘ओजस्विनी अलंकरण’ से सम्मानित किया।

